Saturday, July 21, 2012


हर गम को भूल जाना , मैंने मुनासिब समझा, 
हर राह पे चलना , मैंने मुनासिब समझा,
हर इन्सान को परखना, मैंने मुनासिब समझा,
पर न समझा की, मेरे लिए मुनासिब क्या था।
गम होते हैं तो, खुशिया भी मिल जाती हैं.
हर राह की भी, कोई मंजिल बन जाती हैं।
इन्सान एक गलत हो तो, सही बन जाता हैं।
पर खुद में क्या गलत हैं, सवाल बन जाता हैं।

Sunday, July 15, 2012

हम अक्सर अकेले बैठे रहते हैं ,
और तन्हायिया साथ देने आ जाती हैं.
हम तो उनका बस ख्याल करते हैं,
यादे तो उनकी बस युही आ जाती हैं.
ना देखते हैं तश्वीर उनकी फिर भी,
उनका चेहरा आखो मे चला आता हैं,
प्यार तो वो हमे बहुत करते हैं,
पर दूरिय हैं जो कम नहीं होती हैं.

Saturday, July 14, 2012

तेरे आजाने से ज़िन्दगी मे, हमे कुछ पाने कि ख़ुशी हैं,
पर एक डर अबभी हैं मुझमे, तुझसे कही दूर होने कि,
एहसाश हैं, तेरे साथ होने का, पर तुझसे दुरी कम नहीं,
अक्सर अपने अंदर ही देख लेता  हूँ तुझे छु लेने को,
पर खुद को महसूस नहीं कर पता हूँ खुद मे

Wednesday, June 27, 2012

शक्श एक अन्दर घुट के मार जाता
पर आह नहीं निकल पाती फिजा मे
साथ तन्हाई का भी काम नहीं आता
पर साथ किसीका मन नहीं भाता
जाने  क्या दबा इस मन के अन्दर
सुलग रहा जो फूट जाने को
जाने कौन सा तूफान आने वाला हैं

Wednesday, May 30, 2012

कोई हमसे करके फरियाद, हमारी फरियाद बन गया हैं,
कोई करके हमसे प्यार, हमारा प्यार बन गया हैं,
जिंदगी ना थी इत्ती आसन, पर कोई साथ बन गया हैं,
हम करे लाख जतन ना देखे, पर कोई नज़रो का ख्वाब बन गया हैं|

Thursday, May 17, 2012

एहमियत

साहिल कि एहमियत हैं दरिया के सामने.
राहों कि एहमियत हैं मंजिलो के सामने.
छांव कि एहमियत हैं धूप के सामने.
वैसे मेरी एहमियत हैं तेरे सामने

Friday, May 11, 2012

"मै"

"मै" ही सत्य, "मै" ही असत्य
"मै" ही पूरा, "मै" ही अधुरा
"मै" ही सबकुछ, "मै" कुछना 
"मै" मे मै, "मै" ही हमसब