Monday, March 14, 2011

हम अगर ये कहे प्यार होता नहीं.
हम अगर ये कहे हमें होता नहीं.
झूट हमसे कोई फिरभी कहता नहीं.
है दिल मे मुहब्बत हर किसीके लिए
है दिल मे मुहब्बत हर किसीके लिए.
ये किसी एक को, फिरभी मिलता नहीं....

Wednesday, March 2, 2011

हम जाये कहा खुशियों कि तलाश मे
कि खुशियों का कोई घर होता नहीं,
आज इस घर मे होती हैं खुशी तो,
कल किसी और के घर मे मिलती हैं,
हम चाहे भी तो ना रूकती हैं ख़ुशी
आती जाती ही हैं खुशी अपने मन से
हम जाये कहा खुशियों कि तलाश मे
कि खुशियों का कोई घर होता नहीं,
ये खुशी कि भी अजब चाल हैं
कभी किसी अमीर के पैसो मे हो 
कभी किसी गरीब कि रोटी मे खुशी  
विदा होती दुल्हन के रोने मे छिपी
तो रोते बच्चे कि टॉफी मे खुशी.
हम जाये कहा खुशियों कि तलाश मे
कि खुशियों का कोई घर होता नहीं,
खुशी कि खुशी घर से नहीं होती,
घर के लोंगो मे बसती हैं खुशी |
माँ कि ममता मे खुशी, पिता कि डाट मे,
बहन कि राखी मे खुशी, भाई कि साथ मे,
हम जाये कहा खुशियों कि तलाश मे
की खुद के मन मे बसी होती हैं खुशी
0(-_-)0

Friday, February 25, 2011

हर ख़ुशी की राह, गम से हो गुजरती हैं
फिर रोना क्यों, जिंदगी चार दिन की हैं
हो खुद पे जो यंकी तुमको,
ख़ुशी मे दो बदल गम को
आसमा हैं, जमी भी हैं
ख़ुशी इनके दर्म्या भी हैं
बस एक चाह को छु लो,
दिल मे एक ख़ुशी बसालो
हर ख़ुशी की राह, गम से हो गुजरती हैं
फिर रोना क्यों, जिंदगी चार दिन की हैं


Keep smiling where you are...
sud o(-_-)o

Friday, October 15, 2010

हम फ़रियाद में उनके, झोली फैलाये रह गए
और फरिस्ते मुहब्बत को, जनाजे मे सजा ले गए
गम के दो आशु भी ना बहा सके थे हम कि,
दरिन्द्दे इस जंहान के हमे भी कफ़न दे गए

Saturday, September 18, 2010

नैना

नैना.ना.ना..नैना.
नैना.ना.ना..नैना.
नैना..तेरे नैना 
नैना..तेरे नैना
देखो..कहते हैं ना
नैना.ना.ना.नैना.
चाहे हो खुली, हो चाहे बंद.
इशारों मे ही कहती हैं ना
लुबो कि खामोसी को 
ये तोडती हैं ना.
नैना.ना.ना.नैना.
नैना.ना.ना.नैना.
हैं जंहान में खुदा कि रूह तेरे नैना
एक अम्बर तले दो सागर ये नैना 
मृग नैना .
नैना.ना.ना.नैना.
नैना.ना.ना.नैना
हो खफा तो खंजर भी हैं तेरे नैना.
मुहोब्बत मे क़त्ल करते भी हैं ना.
नए नए से नैना
नैना.ना.ना.नैना.
नैना.ना.ना.नैना

Saturday, September 4, 2010

रेन इज  फाल्लिंग छमा छम छम.
दिल्ली  के कीचड़ मैं गिर गए हम  
लड़की ने जो हाथ बढाया रुक गया दम,
देखने मे वो लग रही थी बिलकुल आइटम

किसी तरह हमने होश को संभाला,
बंद हुई जबान से धन्यवाद निकाला
अपने  हाथो से तश्रीफ़ से  कीचड़ झाटकारा.
फिर उसी हाथ को उस हसी कि ओर उछाला.

वो इस खूबसूरती से मुस्कुराई ,
देख मेरे मन ने ली अंगडाई.
फिर अपना रुमाल मेरी तरफ बढाया.
कहा करलो जरा अपने तश्रीफ़ का सफाया. 



अब हमे अपने कपड़ो का ध्यान आया
जो अपनी पैंट पे नज़र को दौडाया.
तो मेरी फट चुकी कि थी हर तरह से 
बचपन का नज़ारा सरेआम हो आया

शिला आंटी जी से गुजारिश हैं हमारी.
कोमनवेल्थ गेम से पहले सड़के बनवाए 
और गड्ढो से घिरी दिल्ली मे लडको को 
कम से कम लडकियों के सामने ना गिराए.