Thursday, December 15, 2011

कुछ कुछ

कुछ हम कहे आपसे, कुछ आप ना कहे .
कुछ हम चले साथ, कुछ आप ना चले .
कुछ हम ना माने, कुछ आपने माना.
कुछ हम ना चाहे, कुछ आपने चाहा .
इस कुछ कुछ के चक्कर में हम थे
वरना कुछ कुछ होना था हमारे बीच

Monday, November 28, 2011

एक समंदर डूब गया, पानी की एक प्याले मे.
आसमा सारा सिमट गया, स्याही की एक बूंद में.
राख हुआ जा रहा जल, अपने पापो से जल जल के
धरती का छोर मिला, हाथ रह गए हम मल मल के........

Monday, October 3, 2011

धड़कन सुना रही है सच,
पर दिल मे कोई आह नहीं हैं.
मंजिल की तस्वीर देखी थी,
पर उसकी कोई राह नहीं हैं.
आवाजो मे धिक्कार भरी थी,
पर सुनने को कान नहीं हैं.
बदले की आवाज कुचल्दो
ये खुदका सम्मान नहीं हैं.
ज़ंजीरो में बंधा न था मै,
पर मै खुद मै अज्जाद नहीं हैं
तन मन की एक प्यास जगी थी पर
भुझ जाने को संसार खड़ी हैं
लगने को तो ठेश बहुत सी
पर मरने को जान नहीं हैं
मिला था सबका प्यार बहुत तो,
पर मिलाने को आँख नहीं हैं.

Tuesday, August 2, 2011

एक ख्याल दिल के आसमा पे छाया हैं
की जिंदगी खुला आसमा क्यों नहीं होती
क्यों उससे सारी जिंदगी साफ़ नहीं दिखती
जब कभी उम्मीद की गर्मी बढती हैं
तो एक काला बादल क्यों छा जाता हैं
जो हर वक़्त हमारे दिल को लुभाता रहे
जिन्दगी वो एक मौसम क्यों नहीं बन जाती

उम्मीद का बदल, गर्म पलो के बाद आता हैं
खुसी का एहसास, हमे गम के बाद आता हैं

Tuesday, July 5, 2011

अगर तू हँस रहा तो, ये दुनिया हंस पड़ेगी|
अगर तू रो पड़ा तो, ये तुझपे हँसेगी |
तू करले मुट्ठी मे दुनिया, तो ये तेरी सुनेगी 
जो इससे डर गया तू, ये तुझको डसलेगी |
 
किसे तू अपना कहेगा, किसका तू अपना ही होगा
सोचे तो सब तेरे अपने, दुनिया मे तू हैं सबका
 
 

Saturday, June 25, 2011

हम उनके हुस्न के नशे मे चूर थे,
वो चुपके से आके दिल चुरा ले गए...
जब देखा हमारा प्यार उस दिल मे,
मुस्कुराके वो, दिल से खेलते रह गए...


ये दिल न जाने क्यों भूलजाता,
दिल को हैं जो  यु  लुभाता,
वो जो मेरे न पास आता,
दिल को  वो हैं बस जलाता,
बेवफा वो हैं कहलाता .....  हाआआआआ .
मंजिल मुझे मिल गयी मेरी, पर रस्ते मेरे खो गए.
खुशिया तो मुझे मिली बहुत, पर मुस्कराहट कही खो गयी
कही सपनों के पास, कही हकीकत से दूर
हर वक़्त तेरे साथ मै खुसी दुन्ड़ता रहा
मेरी ख्वाहिस के पास, मेरी किस्मत से दूर.
हर वक़्त तुझे मै अपना समझता रहा......